इस कदर खामोशियों में जीने लगे हम





Hindi poem

Hindi poem इस कदर खामोशियों में जीने लगे हम

इस कदर खामोशियों में जीने लगे हम
के शोर धड़कन का होता है
और हम उनकी दस्तक ढूँढ लेते है
के आँसू इस दिल से रिहा होता है
हम आँखें मूँद लेते है
डरता है दिल अकेले होने से ख्वाब में ही
उनकी बाँहें ढूँढ लेते है



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