वक़्त जरा सा पाऊं।।

Poetry in hindi वक़्त जरा सा पाऊं




Poetry in hindi वक़्त जरा सा पाऊं

Poetry in hindi वक़्त जरा सा पाऊं

कभी खुद तक पहुंच जाऊँ ..
खुद को पाऊं..
भूल गया मैं मुझको ..
याद ज़रा सा आऊँ ..
लहरों पर बैठे सपनों में ..
डूब जाना चाहूँ ..
पानी की बूंदों सा..
खुद में कूद जाना चाहूँ ..
परिंदा सा में ..
ज़मीं को ..


भूल जाना चाहूँ …
आसमां की गहराई में ..
चार दीवारों को ना पाऊं ..
सफर की गली में ..
तन्हा कुछ गाऊं..
अपने दिल से घोसले में ..
डरकर लौट ना आऊं ..
तलाशती उन नज़रों की ..
नज़र में ना आऊं ..
डरती धड़कन की आंखों से ..
थोड़ा छुप जाना चाहूँ ..
मुलाकात एक मुझसे मेरी ..
ढूंढ लेगी मुझको ..
शायद यूँ ही मैं तो बस .
इतना वक्त पाना चाहूँ ..
भूल गया मैं खुद को
याद ज़रा सा आऊँ।
क्यूं इन लव्जों की भीड़ में
मैं वक़्त को गवाऊं
क्यूं ना इस हसीन वक्त में।
मैं थोड़ा सा मुस्कुराऊं।।

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2 thoughts on “वक़्त जरा सा पाऊं।।

  1. KnM says:

    Lovely and true words…😆
    Hmm sabhi chle ja rhe hen… Na Jane kise mode kise manjil ja rhe hen… Bhula ke khudeko ise jindagi me… Ek safre jiye ja rhe hen…

     

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