आसिफा

Poem in hindi आसिफा




Poem in hindi आसिफा

Poem in hindi आसिफा

वो सहम गई होगी।
वो सिहर गई होगी।
शायद वो हारकर।
बिखर गई होगी।
क्या गलती थी उसकी।
वो सजा से लिपट गई होगी।
वो तन्हा एक नन्ही कली।
खुद में सिमट गई होगी।
दर्द भी नहीं जानती थी जो।
आंसुओं से भर गई होगी।
कैद घूरती निगाहों से।
कितना डर गई होगी।
बंद आँखों की रोशनी में।


एक बार घर गई होगी।
फिर ताकती निगाहें।
उसपर पड़ रही होंगी।
वो नन्ही सी कली।
कितनों में बंट गयी होगी।
डर कर उन इशारों से।
खुद में सिमट गई होगी।
वो सहम गई होगी।
वो सिहर गई होगी।
शायद वो हारकर।
बिखर गई होगी।
बिछड़ गई होगी उस पल।
नन्हे कोमल सपनों से।
गले लग रोना चाहती होगी।
वो कली अपनों से।
उसकी आँखों के हर आंसू में।
कितनी चीखें समाई होंगी।
उसके छोटे से बचपन नें।
हर उस पल में।
कितनी चोटें खाई होंगी।
वो पिता के साये से
कितना दूर होगी
वो उस वक़्त में रहने को
कितना मजबूर होगी
किसी दिल के कोने से वो
लिपट गयी होगी
तड़प कर वो खुद ही में
सिमट गयी होगी
वो सहम गयी होगी
वो सिहर गयी होगी
शायद वो हारकर
बिखर गयी होगी

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