हिन्दी कविता यादों का खत

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हिन्दी कविता

हिन्दी कविता यादों का खत

कुछ लव्ज अधुरे लिखता हूँ।
शायद वो आकर लिख दे उन्हें।।
हां स्याही रूठ जाती है।
नजाकत तो उसकी भी कम नही।
अफसानो का खत लिखता हूँ।
यादें मुकम्मल करने को।
बेसब्री की आंधी में।
आंखें  छलक जाती है।
नाराज तो हम नहीं।
उसकी मुलाकात छेड़ देती है।
मेरी नींद में आकर।
कैद पंछी  फिर उडता है।
सपने में पंख लगाकर।
फिर नींदे ही उठ जाती है।
ख्वाब तो कम नहीं।
महफिल में बैठकर।।
गैरों से गम बतियाता हूं।
अपनों की जिंदगी में।
मुस्कुराहट है मेरी गम नहीं।
हर शब भीग जाती है।
इन आंसुओं से मेरी।
अब दिन में फूरसत कहां।
तेरी राह को ढूंढता हूं।
अब उम्मीद से नया।
कोई और मरहम नही।
ठहरा है हर्फ कोई जुबां पर।
तुझसे शिकवा करने को।
पर कैद रखा है दर्द।
आंसुओं में भरने को।
जाहिर होने को तो।
आंसू भी कम नहीं।।

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