हिन्दी कविता यादों का खत

हिन्दी कविता





हिन्दी कविता

हिन्दी कविता यादों का खत

कुछ लव्ज अधुरे लिखता हूँ।
शायद वो आकर लिख दे उन्हें।।
हां स्याही रूठ जाती है।
नजाकत तो उसकी भी कम नही।
अफसानो का खत लिखता हूँ।
यादें मुकम्मल करने को।
बेसब्री की आंधी में।
आंखें  छलक जाती है। Continue reading