चल रे नारी





Women day poetry

Women day poetry चल रे नारी

अरमानों की चोखट पर
क्यू है डर के ताले
अब भी बैठी है तेरी नज़रें
सपनो को सँभाले
बूंद सी फिर बरस कहीं पर
क्यू है बादलों के हवाले
चल रे नारी
चल रे फिर तू
बिन कोई पहरा डाले
चल रे नारी
चल रे फिर तू
बिन आंसू कोई निकाले Continue reading